मेरा भारत आशिष पाये

By Vikram Rajput Singh

Contributing Author for Spark Igniting Minds


हो दूर सभी से विषमता

सब कोई प्रेम ही पाएँ

नफरत की ना हो दीवारें

बस मंगल पवन सुहाए


कृपा हो उस भगवन् की

ना कोई जान गँवाए

फूल खिले सुंदर बगिया में

कोयल सुमधुर गाए


ऊँचा शिक्षा का स्तर हो

जगत् भी शीश नवाए

खेल कूद में हो अव्वल

पुरस्कार सब में पाएँ


ना सूनी हो कलाई किसी की

ना मांँग किसी की उजड़े

रहे हाथ सदा ही सिर पे

ना भाई किसी का बिछड़े


अमन चैन हो बढ़ता

खुशी खेतों में लहराए

पाए वह ऊँचाई की

नाम चाँद पे लिख आए


शांति, सहनशीलता, संस्कार

यह बस ना शब्द हो

हम जीएँ और अपनाएँ

हम को इसपे गर्व हो


मान लेना यह प्रार्थना

हम सब यह सुख पाए

बस देना प्रभु वरदान तुम की

मेरा भारत आशीष पाए...


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